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नए सत्र से 75 से कम छात्रों वाले कॉलेज होंगे बंद

75 से कम छात्रों वाले कॉलेज इस सत्र से बंद करने की तैयारी
नई शिक्षा नीति के तहत छात्र संख्या के आधार पर होंगे स्नातक कोर्स
50 कॉलेजों में शुरू होंगे स्किल बेस्ड बी.वोक कोर्स



हिमाचल प्रदेश में उच्च शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि इस शैक्षणिक सत्र से जिन कॉलेजों में 75 से कम विद्यार्थी नामांकित होंगे, उन्हें बंद किया जाएगा या उनकी वर्तमान व्यवस्था में बदलाव किया जाएगा। यह कदम नई शिक्षा नीति 2020 के तहत उठाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य संसाधनों का बेहतर उपयोग और शिक्षा की गुणवत्ता को मजबूत करना है।

शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने बताया कि कम विद्यार्थी संख्या वाले कॉलेजों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे में छात्रों को बेहतर सुविधाओं वाले बड़े संस्थानों में स्थानांतरित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। दाखिला प्रक्रिया पूरी होने के बाद जिन कॉलेजों में छात्र संख्या 75 से कम रह जाएगी, उनके संचालन पर पुनर्विचार किया जाएगा।

नई व्यवस्था के तहत अब स्नातक पाठ्यक्रम भी छात्र संख्या के आधार पर संचालित होंगे। जिन कॉलेजों में अधिक नामांकन होगा, वहां चार वर्षीय डिग्री कार्यक्रम लागू किए जाएंगे, जबकि कम नामांकन वाले संस्थानों में तीन वर्षीय पाठ्यक्रम ही चलेंगे। इस फैसले का सबसे अधिक असर ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के छोटे कॉलेजों पर पड़ सकता है, जहां पहले से ही छात्र संख्या सीमित है।

सरकार का तर्क है कि इस कदम से न केवल संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा, बल्कि छात्रों को बेहतर फैकल्टी, इंफ्रास्ट्रक्चर और शैक्षणिक वातावरण भी मिल सकेगा। कॉलेज प्रबंधन को निर्देश दिए गए हैं कि वे नामांकन, शिक्षकों की उपलब्धता और बुनियादी ढांचे से संबंधित पूरी जानकारी तैयार रखें।

इसी के साथ सरकार ने रोजगार आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए भी बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के करीब 50 कॉलेजों में बी.वोक (वोकेशनल) कोर्स शुरू किए जाएंगे। इन कोर्सों के जरिए छात्रों को पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ स्किल आधारित ट्रेनिंग दी जाएगी, जिससे उनकी रोजगार क्षमता में वृद्धि होगी।

यह कोर्स पर्यटन, सूचना प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य सेवाएं समेत कई क्षेत्रों में शुरू किए जाएंगे। इसके अलावा नई व्यवस्था में विदेशी भाषाओं, इंटर्नशिप, अप्रेंटिसशिप, प्रोजेक्ट वर्क और कम्युनिटी आउटरीच को भी पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाएगा। कॉलेजों को स्थानीय उद्योगों के साथ तालमेल बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि छात्रों को पढ़ाई के दौरान ही व्यावहारिक अनुभव मिल सके।

इस बड़े फैसले से जहां एक ओर शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की उम्मीद जताई जा रही है, वहीं दूसरी ओर छोटे कॉलेजों के भविष्य और ग्रामीण छात्रों की पहुंच को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं।